क्या नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन होने पर विभागीय जांच निरस्त हो सकती है?हाँ — सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित फैसलों के अनुसार, बचाव दस्तावेज न देना, पक्षपाती जांच अधिकारी की नियुक्ति अथवा गवाहों से जिरह का अवसर न देना पूरी जांच प्रक्रिया को आरंभ से ही शून्य बना देता है।Yes — under settled Supreme Court precedents, failure to provide defense documents, appointing a biased inquiry officer, or denying witness cross-examination vitiates the inquiry ab initio.
क्या चल रही विभागीय जांच के दौरान उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है?हाँ — यदि जांच किसी अक्षम प्राधिकारी द्वारा शुरू की गई हो, अत्यधिक विलंब से ग्रस्त हो या दुर्भावनापूर्ण हो, तो अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय जांच पर तुरंत रोक लगा सकता है।Yes — where the inquiry is initiated by an incompetent authority, barred by limitation, or driven by patent malice, Article 226 writs secure interim stays against inquiry reports.